बेंगलुरु में चमकी लखनऊ की प्रतिभा, कलाकृति कॉन्क्लेव 2026 में आराध्या सिंह को मिला राष्ट्रीय सम्मान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की होनहार छात्रा आराध्या सिंह ने अपनी कला प्रतिभा और बहुमुखी उपलब्धियों के दम पर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। बेंगलुरु में आयोजित कलाकृति कॉन्क्लेव 2026 में उन्हें कला, रचनात्मकता और विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और विद्यालय बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित किया है।

हेरिटेज फाउंडेशन ऑफ आर्ट एंड कल्चर द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा को सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से समृद्ध बनाना, उनकी रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देना और भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता विकसित करना है। 29 मई 2026 को बेंगलुरु के बाल भवन में आयोजित इस भव्य समारोह में देश के 15 शहरों से चयनित प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों का चयन वर्षभर आयोजित चार प्रमुख प्रतियोगिताओं, जिनमें ‘वंदना’ सहित अन्य प्रतियोगिताएं शामिल थीं, में प्राप्त अंकों और प्रदर्शन के आधार पर किया गया।

पहली बार शुरू हुआ ‘युवा कलाकार’ मंच

इस वर्ष कलाकृति कॉन्क्लेव में पहली बार ‘युवा कलाकार’ मंच की शुरुआत की गई। कार्यक्रम निदेशक डॉ. किंगशुक घोष ने बताया कि बच्चों में अद्भुत रचनात्मक क्षमता होती है, जिसे सही मंच और पहचान मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा कलाकार पहल का उद्देश्य देशभर की उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर उपलब्ध कराना है।

उत्तर प्रदेश की पहली प्रतिनिधि बनीं आराध्या

दिल्ली पब्लिक स्कूल, गोमतीनगर एक्सटेंशन, लखनऊ की छात्रा आराध्या सिंह को उत्तर प्रदेश की ओर से इस मंच की पहली प्रतिनिधि और उपलब्धि हासिल करने वाली प्रतिभागी के रूप में सम्मानित किया गया। डॉ. किंगशुक घोष ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश से और भी प्रतिभाशाली बच्चे इस मंच तक पहुंचकर अपनी पहचान बनाएंगे।

शिक्षा और भाषा कौशल में भी शानदार प्रदर्शन

आराध्या सिंह केवल कला के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि शिक्षा और भाषा कौशल में भी लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने इंग्लिश स्पेल बी स्टेट प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि नेशनल स्पेल बी (ऑल इंडिया) में 61वीं रैंक हासिल की। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष उनकी राष्ट्रीय रैंक 73वीं थी, जिसे उन्होंने अपने अथक प्रयास और समर्पण से सुधारकर 61वीं रैंक तक पहुंचाया।

राष्ट्रीय सम्मान पर क्या बोलीं आराध्या सिंह

राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होने के बाद आराध्या सिंह ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए गर्व और खुशी का क्षण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना उनके सपनों को नई उड़ान देता है। आराध्या ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय को दिया।

उन्होंने बताया कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा आधार निरंतर मेहनत, परिवार का सहयोग और शिक्षकों का मार्गदर्शन रहा है। भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए आराध्या ने कहा कि वह कला और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश तथा भारत का नाम रोशन करना चाहती हैं।

अन्य बच्चों के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि अपने सपनों पर विश्वास रखना चाहिए और पूरी लगन व मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए, सफलता अवश्य मिलती है।

बच्चों को पहचान दिलाने का प्रयास: डॉ. किंगशुक घोष

कार्यक्रम निदेशक डॉ. किंगशुक घोष ने बताया कि कलाकृति कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य बच्चों की शिक्षा को रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समृद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि संस्था युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और अवसर प्रदान करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों का चयन वर्षभर आयोजित चार प्रमुख प्रतियोगिताओं में प्राप्त अंकों, अनुशासन, रचनात्मकता और समग्र प्रदर्शन के आधार पर किया गया। ‘युवा कलाकार’ मंच की शुरुआत के पीछे उद्देश्य ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को मंच उपलब्ध कराना है, जिन्हें अक्सर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता।

आराध्या सिंह की उपलब्धि पर उन्होंने कहा कि वह बेहद प्रतिभाशाली और समर्पित छात्रा हैं तथा उनकी सफलता उत्तर प्रदेश के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

परिवार, शिक्षकों और विद्यालय का रहा अहम योगदान

आराध्या सिंह की इस सफलता के पीछे उनके परिवार, विद्यालय और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संस्था की अध्यक्ष सुश्री चंद्रिका बी. के नेतृत्व में इस राष्ट्रीय आयोजन का सफल आयोजन किया गया। वहीं डीपीएस गोमतीनगर की नृत्य शिक्षिका अमिता श्रीवास्तव ने भी आराध्या की प्रतिभा को निखारने और उन्हें निरंतर प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आराध्या सिंह की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन मिलने पर बच्चे राष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकते हैं। उनकी सफलता आज उत्तर प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है।

Related posts